उत्तर प्रदेश का दिल “उन्नाव जिला: इतिहास, संस्कृति और विकास की कहानी”

संक्षिप्त परिचय

उत्तर प्रदेश को भारत का हृदय कहा जाता है, और इस हृदय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है उन्नाव जिलागंगा और साईं नदियों के बीच बसा यह जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत के लिए जाना जाता है।

उन्नाव न केवल प्राचीन काल से इतिहास के पन्नों में दर्ज है, बल्कि यह अपनी कला, संस्कृति, व्यापार और विकास के लिए भी प्रसिद्ध है।

यह लेख उन्नाव के इतिहास, संस्कृति, कला, व्यापार और अन्य मूलभूत पहलुओं पर प्रकाश डालता है।




भौगोलिक स्थिति

उन्नाव जिला लखनऊ और कानपुर के बीच स्थित है, जो इसे रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाता है।

गंगा, सई और मोरवा जैसी नदियां इस जिले को जलसंपन्न बनाती हैं।

कुल क्षेत्रफल: लगभग 4,558 वर्ग किलोमीटर

जनसंख्या (2011): लगभग 31 लाख

उन्नाव का रेलवे स्टेशन







इतिहास की दृष्टि से उन्नाव

उन्नाव का इतिहास प्राचीन काल से शुरू होता है, जब यह क्षेत्र कोसाला साम्राज्य का हिस्सा था और बाद में अवध के सुभा में शामिल हुआ। लगभग 1200 साल पहले, यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था। चौहान राजपूत गोडो सिंह ने 12वीं शताब्दी में इन जंगलों को साफ कर सवाय गोडो नामक शहर की स्थापना की, जो बाद में कन्नौज के शासकों के अधीन आ गया। प्राचीन अवशेषों की खोज से पता चलता है कि यह क्षेत्र बहुत पहले से सभ्य और व्यवस्थित जीवन का गवाह रहा है।

1857-58 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद, ब्रिटिश शासन ने इस क्षेत्र में नागरिक प्रशासन की स्थापना की और 1869 में उन्नाव को वर्तमान स्वरूप में एक जिला बनाया गया, जिसका मुख्यालय उन्नाव शहर में स्थापित हुआ।



प्रमुख स्थल और मंदिर

1. नवाबगंज बर्ड सेंचुरी – प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग।


2. नीबू करोरी बाबा आश्रम (फतेहपुर छौरासी) – देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।


3. प्रसिद्ध गोकुल बाबा मंदिर – उन्नाव शहर में मगरवारा कस्बे में स्थित भगवान महादेव का मंदिर है जो गोकुल बाबा के नाम से प्रसिद्ध है!

उन्नाव प्रसिद्घ गोकुल बाबा मंदिर



4. निराला प्रेक्षागृहसांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र रहे निराला प्रेक्षागृह। स्थानीय लोक गीत, नृत्य और नाटक उन्नाव की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध करते हैं।

5. नाना राव स्मृति स्थल – यह स्थल 1857 की क्रांति के महानायक नाना राव पेशवा की याद में बना है। देशभक्ति की भावना को जगाने वाला एक प्रमुख स्थल है।


6. बिठूर  घाट (गंगा घाट) – धार्मिक दृष्टिकोण से यह घाट बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ लोग आस्था के साथ स्नान व पूजा के लिए आते हैं।


7. शहीद स्मारक – स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में बना यह स्मारक पर्यटकों को देशभक्ति की प्रेरणा देता है।


8. माधव मंदिर (बांगरमऊ) – यह प्राचीन शिव मंदिर आस्था और शांति का केंद्र है।


9. श्री लाल शाह बाबा की दरगाह (उन्नाव शहर) – यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है और हर धर्म के लोग यहां आशीर्वाद लेने आते हैं।


10. जंगलेश्वर महादेव मंदिर (सरोसी क्षेत्र) – यह शिव मंदिर घने वृक्षों के बीच स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।


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🚜 कृषि और उद्योग

उन्नाव मुख्यतः कृषि प्रधान जिला है। गेहूं, धान, आलू, गन्ना और दलहन की खेती यहाँ प्रमुख रूप से होती है। इसके अलावा उन्नाव का चमड़ा उद्योग और कालीन कुटीर उद्योग देशभर में पहचान बना चुका है।

बांगरमऊ और अन्य नगर व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरे हैं, जहां स्थानीय उत्पादों का व्यापार होता है।

प्रमुख फल और सब्ज़ियों की खेती

उन्नाव जिले की उपजाऊ भूमि और सिंचाई की अच्छी व्यवस्था इसे एक कृषि प्रधान क्षेत्र बनाती है। यहाँ मुख्यतः निम्नलिखित फल व सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं:

आम (दशहरी और लंगड़ा किस्में) – जिले के कई गाँवों में आम की बागवानी होती है, जो गर्मियों में व्यापार का बड़ा स्रोत है।

अरहर, गेहूं और धान – खाद्यान्न उत्पादन में उन्नाव की अहम भूमिका है।

आलू और टमाटर – यह सब्जियाँ बड़ी मात्रा में उत्पादित होती हैं और आस-पास के मंडियों में भेजी जाती हैं।

हरी सब्जियाँ जैसे पालक, मैथी, सरसों, लौकी आदि – यहाँ की हरी सब्जियाँ ताज़गी के लिए जानी जाती हैं।





विकास के पथ पर उन्नाव

उन्नाव जिला प्रशासनिक रूप से 6 तहसीलों (उन्नाव, हसनगंज, सफीपुर, पूरवा, बीघापुर और बांगरमऊ) और 16 विकास खंडों में विभाजित है। जिले का क्षेत्रफल 4,558 वर्ग किलोमीटर है, और यह अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

जिला अस्पताल उन्नाव


अन्य विशेषताएं

उन्नाव लेदर इंडस्ट्रीशुक्लागंज और आसपास के क्षेत्र चमड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध हैं।

हस्तशिल्प और कसीदाकारी – यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में कसीदाकारी, लकड़ी के खिलौने और हस्तशिल्प का अच्छा उत्पादन होता है।

MSME (सूक्ष्म उद्योग) तेजी से बढ़ रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के अंतर्गत चमड़ा और कालीन उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।


कैसे पहुँचे उन्नाव?

रेल मार्ग: उन्नाव जंक्शन उत्तर रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में से एक है, जो लखनऊ और कानपुर को जोड़ता है।

सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27 द्वारा यह जिला प्रमुख शहरों से जुड़ा है।

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ (चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट) है, जो लगभग 60 किमी दूर है।

उन्नाव शहर का निराला पार्क






संस्कृति और पर्व

यहां की संस्कृति में ब्रज, अवधी और बुंदेली रंग देखने को मिलता है।
होली, दीपावली, दशहरा के साथ-साथ गंगा दशहरा और मोहर्रम भी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लोक गीत, बिरहा, आल्हा और कव्वाली की परंपरा अब भी जीवित है।


उन्नाव जिले का राजनीतिक परिचय

उन्नाव जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह जिला उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा दोनों में प्रतिनिधित्व करता है और यहाँ के मतदाता हर चुनाव में बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।

लोकसभा सीट (संसदीय क्षेत्र)

उन्नाव लोकसभा क्षेत्र
यह क्षेत्र भारतीय संसद में एक सीट रखता है और इसका राजनीतिक प्रभाव काफी व्यापक है।
वर्तमान सांसद (2029 तक): श्री साक्षी महाराज (भारतीय जनता पार्टी – बीजेपी)


🗺️ विधानसभा सीटें (उत्तर प्रदेश विधानसभा)

उन्नाव जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं:

1. उन्नाव


2. बांगरमऊ


3. मोहान


4. सफीपुर (सुरक्षित – अनुसूचित जाति)


5. पुरवा


6. भगवंतनगर



इन क्षेत्रों में स्थानीय विकास, किसान नीति, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा होती है।

प्रमुख राजनीतिक दल

उन्नाव जिले में मुख्य रूप से निम्नलिखित राजनीतिक दल सक्रिय हैं:

भारतीय जनता पार्टी (BJP)

समाजवादी पार्टी (SP)

बहुजन समाज पार्टी (BSP)

कांग्रेस पार्टी (INC)


राजनीतिक रूप से, यह जिला कभी-कभार सत्ता परिवर्तन का गवाह बनता है और यहाँ की जनता जागरूक होकर मतदान करती है।

राजनीति और विकास

पिछले कुछ वर्षों में उन्नाव जिले में सड़क निर्माण, शिक्षा संस्थानों का विस्तार, किसान योजनाएं और महिला सशक्तिकरण के कई योजनाएं चलाई गई हैं। हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसरों को लेकर अब भी सुधार की आवश्यकता है।

Unnao shahar ki Kotwali

आधुनिक उन्नाव: चुनौतियां और संभावनाएं

उन्नाव आज भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है,

जैसेबेरोजगारी, ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे का असमान विकास। हालांकि, सरकारी योजनाएं, जैसे “एक जनपद एक उत्पाद” और स्मार्ट सिटी पहल, जिले को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना रही हैं। जरदोजी और अन्य हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर उन्नाव न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रहा है।


उन्नाव जिला केवल एक साधारण क्षेत्र नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, और कृषि विरासत का सुंदर संगम है। अगर आप उत्तर भारत की सादगी, इतिहास और खेती की खुशबू महसूस करना चाहते हैं, तो उन्नाव अवश्य आएं।

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